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Astrology Revels The Will Of God

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About Astrology

ज्योतिष ग्रहों को जानने की एक प्राचीन विद्या है। यह हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त एक ज्ञान है। ज्योतिष ग्रहों की गणितीय गणना है। ज्योतिष का सबसे बड़ा लाभ यह है कि व्यक्ति को अपनी अनुकूल और प्रतिकूल स्थिति का ज्ञान हो जाता है, जिससे वह उसके अनुसार कार्य करता है तो विपरीत परिस्थितियों में भी उसे संबल मिलता है। पृथ्वी से कई प्रकाश वर्ष दूर ग्रहों का मानव पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसका अध्ययन ज्योतिष में किया जाता है। ज्योतिष के द्वारा ज्ञात हो सकता है कि कौनसे ग्रह उस पर अच्छा प्रभाव डालेंगे और कौनसे से ग्रह बुरा।

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शैलेश मणि त्रिपाठी

शैलेश मणि त्रिपाठी जी का जन्म जून1983 में हुआ था।लखनऊ यूनिवर्सिटी से एम॰ए॰ और विधि स्नातक करने के बाद उन्होंने प्रबन्धन(management)में भी शिक्षा प्राप्त की।इन सबके अलावा श्री सुरेश श्रीमाली के यहाँ से “ज्योतिष मनीषी”की उपाधि भी प्राप्त किया है।इन सबके अलावा त्रिपाठी जी ने ज्योतिष और वास्तु में निरन्तर ,विगत कई वर्षों से नये नये अनुसंधान किए है।ज्योतिष में एक से एक नये आयाम जोड़ने के साथ ही “ज्योतिष के रहस्य और सिद्धांत” नामक पुस्तक भी इन्होंने लिखी है।पिछले कई वर्षों से इन्होंने अपनी विधा से कई जरूरतमंद लोग की मदद की है।त्रिपाठी जी ने कई motivational speech भी दिए है,जिससे बहुत लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

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ज्योतिष विद्या

ज्योतिष ग्रहों को जानने की एक प्राचीन विद्या है। यह हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त एक ज्ञान है। ज्योतिष ग्रहों की गणितीय गणना है। ज्योतिष का सबसे बड़ा लाभ यह है कि व्यक्ति को अपनी अनुकूल और प्रतिकूल स्थिति का ज्ञान हो जाता है, जिससे वह उसके अनुसार कार्य करता है तो विपरीत परिस्थितियों में भी उसे संबल मिलता है। पृथ्वी से कई प्रकाश वर्ष दूर ग्रहों का मानव पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसका अध्ययन ज्योतिष में किया जाता है। ज्योतिष के द्वारा ज्ञात हो सकता है कि कौनसे ग्रह उस पर अच्छा प्रभाव डालेंगे और कौनसे से ग्रह बुरा।

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वास्तु

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वास्तु एक प्राचीन वैज्ञानिक पद्घिति है जिसे आज के समय में भी नकारा नहीं जा सकता। कारण यह है कि संसार में सभी कुछ उर्जा द्वारा नियंत्रित है। उर्जा दो तरह की होती है नकारात्मक और सकारात्मक। जहां वास्तु अनुकूल होता है वहां सकारात्मक उर्जा का संचार होता और जहां वास्तु में किसी प्रकार का दोष आता है तो नकारात्मक उर्जा का संचार होने लगता है जो स्वास्थ्य की हानि से लेकर आर्थिक परेशानी का कारण बनकर तकलीफ देता है।

गणेश जी शुभ लाभ के दाता हैं। इसलिए घर में इनकी मूर्ति या तस्वीर सभी लोग रखते हैं। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि गणेश जी घर के बाहर की ओर देखेंगे तो धन और शुभ लाभ का घर में आगमन होगा। जबकि वास्तु का सिद्घांत इससे बिल्कुल अलग है। गणेश जी का मुख हमेशा घर के अंदर की ओर होना चाहिए और पीठ बाहर की ओर। गणेश जी बाहर की ओर देखेगे तो लाभ बढ़ने की बजाय कम हो सकता है।

वास्तु विज्ञान के अनुसार उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है जो धन वृद्घि कारक है। इस दिशा में जल स्रोत यानी नल, पानी का मटका, वॉटर फिल्टर होने से धन की वृद्घि है। लेकिन कई लोग अनजाने में दक्षिण या पश्चिम दिशा में मटका, नल या दूसरे जल स्रोत रखना शुरु कर देते हैं। इससे धन आगमन में बाधा आती है और खर्च भी बढ़ने लगता है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जल स्रोतों से जल का रिसाव नहीं हो। पानी का टपकते रहना आर्थिक नुकसान का कारण होता है।

कई लोग घर के कबाड़ को छत पर ले जाकर रख देते हैं। जबकि छत हमेशा साफ होना चाहिए। वास्तु विज्ञान के अनुसार छत के ऊपर कभी भी मटका और बर्तन उलटा करके नहीं रखना चाहिए। इससे आकस्मिक हानि होती है। घर का स्वामी तनाव और आर्थिक परेशानियों में रहता है।

वास्तु विज्ञान में धन वृद्घि की इच्छा है तो जिस अलमारी या तिजोरी में धन रखते हैं उसे पश्चिम की दीवार से लगकर रखें। इससे तिजोरी और अलमारी का मुंह पूर्व दिशा की ओर खुलेगा और देवराज की कृपा दृष्टि आप पर बनी रहेगी। उत्तर की दिशा से अलमारी या तिजोरी लगाकर रखने से उसका मुंह दक्षिण दिशा में खुलता है जो नुकसानदेय होता है।

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कुंडली मिलान

Tarot Card

कुंडली में कुंडली मिलान भी एक महत्वपूर्ण अंग है।कुंडली मिलन में वैसे तो १८ गुर ठीक माना जाता है,लेकिन२२ गुर कम से कम मिले तो शादी के लिए ठीक होता है। नाड़ी दोष और ग्रह मैत्री को प्रमुखता देनी चाहिए।सातवाँ घर, लड़की का आँठवा घर पर यदि क्रूर ग्रह है तो उसको भी प्रमुखता से देखना चाहिए।

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